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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

लुहाना(Luhana)

लुहाना गाँव महेंद्रगढ़ रोड पर सींहा गाँव से आगे बसा हुआ है|

बुधवार, 30 मार्च 2011

करनावास(Karnawas)

करनावास रेवाड़ी-बवाल रोड पर बसा एक गाँव हैं जिसमे इंडियन ऑयल कॉरपोरेसन का डिपो हैं|

मंगलवार, 1 मार्च 2011

मीरपुर(Meerpur )

मीरपुर रेवाड़ी जिला का एक बड़ा गाँव हैं जिसमे  महृषी दयानंद  विश्वविध्यालय  रोहतक का पोस्ट ग्रेजुट रीजनल  सेंटर स्थापित किया गया हैं  यह  गाँव  अब  शिक्षा के  क्षेत्र   में  बहुत तेजी से उभरता हुआ गाँव बन गया हैं इस गाँव में कैंसर रिसर्च सेंटर भी स्थापित  हो चुका हैं जिसमे दूर दराज से लोग इलाज व शिक्षा लिए आने लगे हैं| दिल्ली से आने वाले व्यक्ति रेवाड़ी से लगभग पांच किलोमीटर पहले धारूहेड़ा रोड पर  फिदेड़ी नमक गाँव से होते हुए पहुँच सकते  है |

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

गेंहूँ (Wheat )

गेंहू की फसल की बिजाई रेवाड़ी जिले में नवम्बर से दिसम्बर के बीच महीने में होती हैं|

गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

फिदेडी(Phideri )

राज्य    : हरियाणा
मंडल    : गुडगाँव 
जिला    : रेवाड़ी
उप-मंडल : रेवाड़ी  
तहसील  : रेवाड़ी
खंड     : रेवाड़ी
गाँव     : फिदेडी
डाक-खाना : माजरा श्योराज                
पिन-कोड     : 123401
रेवाड़ी शहर के पूर्व में फिदेडी एक छोटा सा गाँव हैं|

मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

माजरा श्योराज (Majra Sheoraj)

राज्य    : हरियाणा
मंडल    : गुडगाँव
जिला    : रेवाड़ी
उप-मंडल : रेवाड़ी  
तहसील  : रेवाड़ी
खंड     : रेवाड़ी
गाँव     : माजरा श्योराज
डाक-खाना : माजरा श्योराज
पिन-कोड     : 123401   
माजरा श्योराज सभी सुविधाओ से संपन्न एक बड़ा गाँव हैं जिसमे  कई शिक्षण संस्थाए, एक पशु चिकित्सालय हैं  तथा गाँव दो सड़क मार्गो से जुडा हुआ हैं गाँव के उत्तर की तरफ से जाने वाला मार्ग मसानी के पास जाकर रास्ट्रीय राज मार्ग नम्बर ८ से मिल जाता हैं वाही गाँव के दक्षिण की तरफ से जाने वाला मार्ग गाँव कह्नावास के पास जाकर रास्ट्रीय राज मार्ग नम्बर ८ से मिल जाता हैं वैसे तो इस गाँव में हर जाती के लोग रहते परन्तु मुख्य तौर पर गाँव अहीर जाती के गीरद गोत्र के लोगो के निवास के  लिए जाना जाता हैं गाँव में एक पोस्ट आफिस भी हैं | गाँव के घरो में मिलने वाले प्रमुख पालतू दुधारू पशु गाय, भैंस  हैं| इसके अतरिक्त गाँव में सामान्य रूप से दिखने वाले अन्य जानवर बिल्ली, कुता, गिलहरी आदि हैं| गाँव की प्रमुख फसले  गेंहू, सरसों, ग्वार, बाजरा, ज्वांर हैं|      

शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

इंदोख का वृक्ष(A tree of Indokh)


इन दोनों तस्वीरो में आप जो दो वृक्ष साथ-साथ देख रहे हैं ये वृक्ष हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले के गाँव खलीलपुरी में खड़े हैं  इनमे से एक से तो आप भली-भाती परिचित हैं वह वृक्ष हैं पीपल का, जिसका की हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व हैं जिसे की इस धर्म में देव तुल्य समझा जाता हैं लेकिन इसके पास खड़ा दूसरा वृक्ष जिसका वानस्पतिक नाम तो मैं नहीं जानता लेकिन यहाँ इस इलाके में इसे इंदोख के नाम से जाना जाता हैं | इस वृक्ष की आस पास के चार गाँवों में पूजा होती हैं जो की यादव बाहुल्य गाँव हैं तथा इनमें ज्यादातर यादव जाति के गिद गोत्र के लोग रहते हैं इन गाँवों के नाम खलीलपुरी, माजरा श्योराज, हांसाका, फिदेड़ी हैं जहाँ पर इस वृक्ष को  काटना व इसकी लकड़ी को जलाने की मनाही हैं यह कोई क़ानूनी प्रावधान नहीं हैं अपितु स्वयं लोग धार्मिक आस्था के कारण इसके इस प्रकार के इस्तेमाल से डरते हैं| एक और अनोखी मान्यता भी हैं जिसके अनुसार इस वृक्ष की जड़ की मिट्टी को चर्म रोगों पर लगाने से वे रोग ठीक हो जाते हैं | इस तरह की धारणाये कब से प्रचलित हैं इस विषय पर कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं लेकीन यहाँ के लोगो से पूछने पर बस इतना पता चलता हैं की इस तरह की धारणाये स्मर्ति से परे हैं जो की बहुत बरसो पुरानी हो सकती हैं |