लुहाना गाँव महेंद्रगढ़ रोड पर सींहा गाँव से आगे बसा हुआ है|
ब्लॉग का उद्देश्य रेवाड़ी जिला के निवासियों के रहन-सहन,वेश-भूषा, त्यौहारों,छोटी-बड़ी रस्मो,वनस्पतियों,जानवरों,पशु-पक्षियों,मौसम आदि के बारे अवगत करवाना हैं| आप सभी पाठको से अनुरोध हैं अगर आपको इस ब्लॉग में वर्णित किसी भी लेख के सम्बन्ध में कोई जानकारी हैं तो उसे टिप्पणी के रूप में अवश्य भेजे| ताकि अन्य पाठक लाभ उठा सके| शुरूआत में कुछ लेखों में आपको अल्प जानकारी उपलब्ध हो सकती हैं उसका लेखक को खेद हैं लेकिन लेखक का अनवरत प्रयत्न रहेगा की आपको अधिक से अधिक जानकारी उपलब्ध हो सके|
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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011
बुधवार, 30 मार्च 2011
करनावास(Karnawas)
करनावास रेवाड़ी-बवाल रोड पर बसा एक गाँव हैं जिसमे इंडियन ऑयल कॉरपोरेसन का डिपो हैं|
मंगलवार, 1 मार्च 2011
मीरपुर(Meerpur )
मीरपुर रेवाड़ी जिला का एक बड़ा गाँव हैं जिसमे महृषी दयानंद विश्वविध्यालय रोहतक का पोस्ट ग्रेजुएट रीजनल सेंटर स्थापित किया गया हैं यह गाँव अब शिक्षा के क्षेत्र में बहुत तेजी से उभरता हुआ गाँव बन गया हैं इस गाँव में कैंसर रिसर्च सेंटर भी स्थापित हो चुका हैं जिसमे दूर दराज से लोग इलाज व शिक्षा लिए आने लगे हैं| दिल्ली से आने वाले व्यक्ति रेवाड़ी से लगभग पांच किलोमीटर पहले धारूहेड़ा रोड पर फिदेड़ी नमक गाँव से होते हुए पहुँच सकते है |
शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011
गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011
माजरा श्योराज (Majra Sheoraj)
गाँव : माजरा श्योराज
डाक-खाना : माजरा श्योराज
पिन-कोड : 123401
माजरा श्योराज सभी सुविधाओ से संपन्न एक बड़ा गाँव हैं जिसमे कई शिक्षण संस्थाए, एक पशु चिकित्सालय हैं तथा गाँव दो सड़क मार्गो से जुडा हुआ हैं गाँव के उत्तर की तरफ से जाने वाला मार्ग मसानी के पास जाकर रास्ट्रीय राज मार्ग नम्बर ८ से मिल जाता हैं वाही गाँव के दक्षिण की तरफ से जाने वाला मार्ग गाँव कह्नावास के पास जाकर रास्ट्रीय राज मार्ग नम्बर ८ से मिल जाता हैं वैसे तो इस गाँव में हर जाती के लोग रहते परन्तु मुख्य तौर पर गाँव अहीर जाती के गीरद गोत्र के लोगो के निवास के लिए जाना जाता हैं गाँव में एक पोस्ट आफिस भी हैं | गाँव के घरो में मिलने वाले प्रमुख पालतू दुधारू पशु गाय, भैंस हैं| इसके अतरिक्त गाँव में सामान्य रूप से दिखने वाले अन्य जानवर बिल्ली, कुता, गिलहरी आदि हैं| गाँव की प्रमुख फसले गेंहू, सरसों, ग्वार, बाजरा, ज्वांर हैं|
माजरा श्योराज सभी सुविधाओ से संपन्न एक बड़ा गाँव हैं जिसमे कई शिक्षण संस्थाए, एक पशु चिकित्सालय हैं तथा गाँव दो सड़क मार्गो से जुडा हुआ हैं गाँव के उत्तर की तरफ से जाने वाला मार्ग मसानी के पास जाकर रास्ट्रीय राज मार्ग नम्बर ८ से मिल जाता हैं वाही गाँव के दक्षिण की तरफ से जाने वाला मार्ग गाँव कह्नावास के पास जाकर रास्ट्रीय राज मार्ग नम्बर ८ से मिल जाता हैं वैसे तो इस गाँव में हर जाती के लोग रहते परन्तु मुख्य तौर पर गाँव अहीर जाती के गीरद गोत्र के लोगो के निवास के लिए जाना जाता हैं गाँव में एक पोस्ट आफिस भी हैं | गाँव के घरो में मिलने वाले प्रमुख पालतू दुधारू पशु गाय, भैंस हैं| इसके अतरिक्त गाँव में सामान्य रूप से दिखने वाले अन्य जानवर बिल्ली, कुता, गिलहरी आदि हैं| गाँव की प्रमुख फसले गेंहू, सरसों, ग्वार, बाजरा, ज्वांर हैं|
शुक्रवार, 5 नवंबर 2010
इंदोख का वृक्ष(A tree of Indokh)
इन दोनों तस्वीरो में आप जो दो वृक्ष साथ-साथ देख रहे हैं ये वृक्ष हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले के गाँव खलीलपुरी में खड़े हैं इनमे से एक से तो आप भली-भाती परिचित हैं वह वृक्ष हैं पीपल का, जिसका की हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व हैं जिसे की इस धर्म में देव तुल्य समझा जाता हैं लेकिन इसके पास खड़ा दूसरा वृक्ष जिसका वानस्पतिक नाम तो मैं नहीं जानता लेकिन यहाँ इस इलाके में इसे इंदोख के नाम से जाना जाता हैं | इस वृक्ष की आस पास के चार गाँवों में पूजा होती हैं जो की यादव बाहुल्य गाँव हैं तथा इनमें ज्यादातर यादव जाति के गिड़द गोत्र के लोग रहते हैं इन गाँवों के नाम खलीलपुरी, माजरा श्योराज, हांसाका, फिदेड़ी हैं जहाँ पर इस वृक्ष को काटना व इसकी लकड़ी को जलाने की मनाही हैं यह कोई क़ानूनी प्रावधान नहीं हैं अपितु स्वयं लोग धार्मिक आस्था के कारण इसके इस प्रकार के इस्तेमाल से डरते हैं| एक और अनोखी मान्यता भी हैं जिसके अनुसार इस वृक्ष की जड़ की मिट्टी को चर्म रोगों पर लगाने से वे रोग ठीक हो जाते हैं | इस तरह की धारणाये कब से प्रचलित हैं इस विषय पर कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं लेकीन यहाँ के लोगो से पूछने पर बस इतना पता चलता हैं की इस तरह की धारणाये स्मर्ति से परे हैं जो की बहुत बरसो पुरानी हो सकती हैं |
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